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सद्गुरु कबीर साहेब 618 प्राकट्य उत्सव २ जून २०१५

May 27, 2015
Saheb

चौदह सौ पचपन साल गए
चंद्रवार एक ठाठ ठए
ज्येष्ठ सुदी बरसायत को
पूरणमासि प्रगट भए

सप्रेम साहेब बन्दगी साहेब
हमारे हृदय मन्दिर के आराध्य सतपुरुष सद्गुरु कबीर साहब वि.स. 1455 में ज्येष्ठ पूर्णिमा सोमवार के दिन काशी के लहर तारा में कमल पुष्प पर प्रगट हुए, इसलिए हम भक्तगण ज्येष्ठ पूर्णिमा को अपने सद्गुरु का प्रगट दिवस मानते हैं। वैसे तो साहेब ने कहा है ” आवे न जावे मरे नही जन्मे, सो निज पिव हमारा हो” साहब का कभी जन्म मरण नही होता वे प्रगट होते हैं और अंतर्ध्यान हो जाते हैं।

भाइयों बहनो अभी ज्येष्ठ का महीना चल रहा है और 2 जून को पूर्णिमा है जो हमारे साहब का प्रगट दिवस है, हम समस्त कबीर पन्थियों को अपने सद्गुरु का प्रगट उत्सव बहोत हर्षोल्लास से मनाना चाहिए, हर नगर मोहल्ले छोटे से छोटे गांव में जहां भी कबीर पंथी हों जितने भी परिवार हों आपस में मिल कर यथाशक्ति प्रगट उत्सव का आयोजन करना चाहिए। प्रातः गुरु महिमा पाठ पूनो महातम पाठ के साथ उत्सव प्रारम्भ करे उसके बाद हो सके तो एक छोटी सी कलश यात्रा साहब के चित्र और सत्यनाम के ध्वजा के साथ निकले फिर भजन कीर्तन करें साहब की आरती करें सम्भव हो तो भंडारा करें ज्यादा नही तो पूड़ी सब्जी और एक मिठाई या सिर्फ मिठाई या कम से कम शर्बत सब को पिलाएं और दिन भर स्पीकर पर साहब की वाणी बजने दें…

पंथ श्री हुजुर प्रकाशमुनिनाम साहेब